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कोविड-19 आज भी बुज़ुर्गों और लंबे समय से चली आ रही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। समय पर पहचान, निदान और इलाज़ से मरीज़ों के नतीजे काफ़ी बेहतर हो सकते हैं, फिर भी कई ऐसे मरीज़ जिन्हें इलाज़ मिलना चाहिए, समय रहते ज़रूरी कदम उठाने का मौका चूक जाते हैं।
यह मुफ़्त कोर्स व्यस्त डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बनाया गया है और इसे आप अपनी सुविधा और रफ़्तार से पूरा कर सकते हैं। पाँच छोटे मॉड्यूल (हर एक 10 से 15 मिनट का) के ज़रिए आपको ऐसे प्रैक्टिकल और एविडेंस पर आधारित तरीके मिलेंगे, जिनसे गंभीर कोविड-19 के उच्च-जोखिम वाले मरीज़ों की देखभाल बेहतर की जा सके।
यह कोर्स डॉक्टरों, व्यवहार विज्ञान के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने मिलकर तैयार किया है। इसमें मौजूदा क्लिनिकल एविडेंस को व्यवहार विज्ञान के टूल्स के साथ जोड़ा गया है, ताकि मरीज़ों से असरदार बातचीत की जा सके, इलाज़ लेने में हिचकिचाहट को दूर किया जा सके, और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त तथा मरीज़ की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर दी जाने वाली देखभाल (पेशेंट-सेंटर्ड केयर) दी जा सके।
शुरू करने से पहले, नीचे दिए गए बटन से एक छोटा प्री-कोर्स असेसमेंट पूरा करें। पाँचों मॉड्यूल पूरे करने के बाद हमारा अनुरोध है कि आप पोस्ट-कोर्स असेसमेंट भी पूरा करें। इससे हमें कोर्स का मूल्यांकन करने, आगे की ट्रेनिंग को बेहतर बनाने, और आपको कोर्स पूरा करने का सर्टिफ़िकेट डाउनलोड करने में मदद मिलेगी। दोनों असेसमेंट में बस कुछ ही मिनट लगते हैं।
हर मॉड्यूल में प्रैक्टिकल उदाहरण और डाउनलोड की जा सकने वाली सामग्री शामिल है, जो सीखने और उसे अपनी क्लिनिकल प्रैक्टिस में लागू करने में मदद करती है।
मैं यह ट्रेनिंग क्यों करूँ?
यह कोर्स डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसे प्रैक्टिकल कौशल देता है जो सिर्फ़ कोविड-19 तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई दूसरी बीमारियों और उच्च-जोखिम वाले मरीज़ों की देखभाल में भी उतने ही काम आते हैं।
1. जोखिम के हिसाब से मरीज़ों को छाँटना और समय रहते ज़रूरी कदम उठाना
उच्च-जोखिम वाले मरीज़ों की पहचान करना, यह जाँचना कि किन्हें इलाज़ मिलना चाहिए, और समय पर ज़रूरी कदम उठाने को प्राथमिकता देना सीखें।
ये कौशल दूसरी संक्रामक बीमारियों (जैसे इन्फ़्लुएंज़ा, RSV) और उन लंबे समय से चली आ रही बीमारियों में भी सीधे काम आते हैं जहाँ जल्दी पहचान से नतीजे बेहतर होते हैं।
2. व्यवहार विज्ञान और मरीज़ की सक्रिय भागीदारी
मरीज़ों की हिचकिचाहट, ग़लतफ़हमियों, या दवा और इलाज़ पर टिके न रह पाने की समस्या को दूर करने के लिए बिहेवियर चेंज की तकनीकें अपनाएँ।
सांस्कृतिक और भाषाई रूप से उपयुक्त बातचीत का कौशल विकसित करें, जो हर क्लिनिकल स्थिति में काम आता है।
3. क्लिनिकल फ़ैसले लेने के व्यवस्थित तरीके
असल मरीज़ों जैसे केस उदाहरणों के ज़रिए व्यवस्थित तरीके से सोचना और गाइडलाइन्स के आधार पर फ़ैसले लेना सीखें।
ये तरीके एट्रियल फ़िब्रिलेशन (AF), मधुमेह, और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) के अचानक बढ़ जाने जैसी स्थितियों को संभालने में भी उतने ही काम आते हैं।
4. डिजिटल और माइक्रोलर्निंग के ज़रिए ट्रेनिंग
मॉड्यूल में बँटा हुआ यह फ़ॉर्मैट, जिसमें ऑनलाइन केस सिनैरियो और प्रैक्टिकल टूल्स शामिल हैं, अपनी सुविधा और रफ़्तार से पूरा किया जा सकता है और दूसरी बीमारियों या प्रोफ़ेशनल डेवलपमेंट के कार्यक्रमों के लिए भी ढाला जा सकता है।
5. मूल्यांकन और रिफ्लेक्टिव प्रैक्टिस
ट्रेनिंग से पहले और बाद के असेसमेंट खुद पर नज़र डालने और लगातार सीखते रहने में मदद करते हैं, जो किसी भी क्लिनिकल विषय या ट्रेनिंग कार्यक्रम पर लागू होता है।
मॉड्यूल
क्या उच्च-जोखिम वाले कोविड-19 मरीज़ पहचान से छूट जा रहे हैं? प्रैक्टिस में जल्दी पहचान को बेहतर बनाएँ
लेखक: एस्टिन सोकांग, यूनिवर्सितास क्रिस्टेन क्रिडा वचाना, इंडोनेशिया; त्रियाना केसुमा देवी, यूनिवर्सितास ऐरलंग्गा, इंडोनेशिया; यूहांग झू, शानदोंग सेकंड मेडिकल यूनिवर्सिटी, चीन; गिल टेन होर, मास्ट्रिख्ट यूनिवर्सिटी, नीदरलैंड्स ज़्यादातर वयस्कों में, कोविड-19 हल्की…
कोविड-19 के उच्च-जोखिम वाले मरीज़ों में जल्दी इलाज़ शुरू करने की अहमियत और उसके बेहतर फ़ायदे
लेखक: इरेम बेरना ग्यूवेंच एर्दोआन, मिडिल ईस्ट टेक्निकल यूनिवर्सिटी, तुर्की; ईगा पलाच-पोबोरचिक, एसडब्ल्यूपीएस यूनिवर्सिटी, पोलैंड; ओल्गा पेर्स्की, स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी, स्वीडन; शेषन तिवारी, साइफोल्क्स एजुकेशन, भारत; बेल्गिन यूनाल, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, यूएसए कोविड-19…
उच्च-जोखिम वाले मरीज़ों में बिहेवियर चेंज के ज़रिये कोविड-19 की पेचीदगियों को रोकना
लेखक: डेविड साइमन्स, पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी; आयशेगुल बाकिर, हाजेट्टेपे यूनिवर्सिटी, तुर्की; योहाना नुर्मी, यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी, फिनलैंड आमतौर पर कोविड-19 की बात अब भूतकाल में और सिर्फ़ एक साँस से जुड़े इन्फेक्शन के रूप में की जाती है। लेकिन कोविड-19 अभी…
कोविड-19 के बाद की ज़िंदगी: स्वास्थ्य पर पड़े लॉन्ग-टर्म असर से निपटना
डोमिनिका क्वास्नित्स्का, यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया और रिज़मीना रिलवान, श्रीलंका से स्वतंत्र शोधकर्ता कोविड-19 के एक्यूट फ़ेज़ पर तो दुनिया भर का ध्यान रहा है, लेकिन कोविड-19 से शरीर पर पड़ने वाले लॉन्ग-टर्म असर को अब क्लिनिकल प्रैक्टिस में भी तेज़ी से पहचाना…
उच्च-जोखिम समूहों में कोविड-19 के निदान और इलाज़ में व्यवहार विज्ञान का उपयोग
लेखक: ट्रेसी एप्टन, यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर, यूके; लीसा मैरी वॉर्नर, एमएसबी मेडिकल स्कूल बर्लिन, जर्मनी; अलेक्सांद्रा लाज़िच, बेलग्रेड, सर्बिया की स्वतंत्र शोधकर्ता कोविड-19 के उच्च-जोखिम वाले मरीज़ों के साथ काम करना कभी-कभी एक साथ कई बातचीत संभालने जैसा लग सकता है।…